Dussehra 2025 Special: दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रावण के वध के बाद उसका दाह संस्कार किसने किया था? विभीषण ने अपने भाई के दाह संस्कार से मना कर दिया था, तो आखिर फिर किसने यह कार्य किया? आइए विस्तार से जानते हैं।
विभीषण ने क्यों किया मना?
रामायण के अनुसार, जब रावण का वध हुआ तो भगवान श्रीराम ने विभीषण से अपने भाई का दाह संस्कार करने के लिए कहा।
लेकिन विभीषण ने कहा कि –
- रावण अधर्मी था।
- उसने माता सीता का हरण किया।
- उसने अपने कुल और धर्म की मर्यादा तोड़ी।
इसी कारण विभीषण ने उसका दाह संस्कार करने से इनकार कर दिया।
फिर किसने किया रावण का अंतिम संस्कार?
रामायण और पुराणों के अनुसार, जब विभीषण ने दाह संस्कार से मना किया, तब स्वयं भगवान श्रीराम ने रावण के दाह संस्कार का आदेश दिया।
- राम ने कहा कि शत्रु चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, मृत्यु के बाद उसका सम्मान करना धर्म का नियम है।
- राम के आदेश पर रावण का दाह संस्कार विधि-विधान से किया गया।
- कुछ कथाओं के अनुसार, स्वयं राम और लक्ष्मण ने ब्राह्मण बुलाकर रावण का अंतिम संस्कार करवाया।
रावण के दाह संस्कार से क्या संदेश मिलता है?
- धर्म और परंपरा का पालन – शत्रु के लिए भी अंतिम संस्कार करना मानवीय कर्तव्य है।
- अहंकार का अंत – चाहे कितना भी महान क्यों न हो, अहंकारी व्यक्ति का अंत निश्चित है।
- राम का आदर्श चरित्र – भगवान राम ने सिखाया कि मृत्यु के बाद द्वेष नहीं रखना चाहिए।
लोककथाओं में अलग-अलग मत
- कुछ लोककथाओं के अनुसार, विभीषण ने बाद में भगवान राम के आग्रह पर दाह संस्कार किया।
- वहीं कुछ ग्रंथों में लिखा है कि ब्राह्मणों और लंका के नागरिकों की सहायता से राम ने यह कार्य करवाया।
निष्कर्ष
Dussehra Ravan Cremation की कथा हमें यह सिखाती है कि धर्म का पालन सबसे बड़ा कर्तव्य है। भगवान राम ने यह दिखाया कि मृत्यु के बाद हर व्यक्ति सम्मान का हकदार है, चाहे वह शत्रु ही क्यों न हो।


